हर प्रेम किसी पुरानी परंपरा की जागीर नहीं होता।
मैं हर किसी को राँझा नहीं समझता और हर प्रेम कहानी हीर जैसी नहीं होती।
लब कैसे हैं, अब फ़ैसला गुफ़्तार से होगा,
मैं मद-ए-मुक़ाबिल हूँ, कोई मीर नहीं है।
अब किसी के होंठ कैसे हैं, इसका फैसला उसकी बातों से होगा।
मैं सामने खड़ा एक आम इंसान हूँ, कोई महान शायर मीर नहीं हूँ।
आग़ोश-ए-मोहब्बत से न घबराओ हमारे,
चादर है, इसे ओढ़ लो, ज़ंजीर नहीं है।
मेरी मोहब्बत की बाँहों से मत घबराओ,
यह एक ऐसी चादर है जिसे प्यार से ओढ़ा जा सकता है, यह कोई बंधन या ज़ंजीर नहीं है।
बस देखना मक़सद हो तो तस्वीर लगेगी,
महसूस किया जाए तो तस्वीर नहीं है।
अगर किसी को सिर्फ़ देखना हो, तो वह एक तस्वीर है।
लेकिन अगर उसे दिल से महसूस किया जाए, तो वह सिर्फ़ तस्वीर नहीं रह जाती।
चाहे जो लिखे शौक़ से धड़कन की इबारत,
सो शुक्र, मेरे हाथों की तहरीर नहीं है।
दिल की धड़कन चाहे जो कहानी लिखे, उसे लिखने की आज़ादी है।
शुक्र है कि मेरे हाथों में मेरी किस्मत की पूरी कहानी लिखने की ताकत नहीं है।
तुम भी तो नए ख़्वाब का तोहफ़ा लिए आओ,
यानी मेरी तक़दीर में ताबीर नहीं है।
तुम भी कोई नया सपना लेकर मेरे पास आओ,
क्योंकि शायद मेरी किस्मत में अभी उन सपनों के सच होने की कोई ताबीर नहीं है।